श्री त्रिदंडी स्वामी जी के दिव्य ग्रंथ

जगदाचार्य श्रीमद  विष्वकसेनाचार्य स्वामीजी ( श्री त्रिदंडी स्वामी जी ) के दिव्य चरणों का मंगल हो| 220px-Vishwaksenacharya

(22 April 1905 – 2 December 1999)

काषायं यज्ञसूत्रं शुचिवपुषि तथा चोर्ध्वपुण्ड्रं च भाले,
यस्यास्ते -दक्षहस्ते कलिकुमतिगिरीन्देन्द्रवज्रं त्रिदण्डम्।
संसाराग्निप्रशान्त्यै -भृतजलममलं दारुपात्रं पवित्रं,
श्रीविष्वक्सेनसूरे: पदकमलयुगं श्रेयसे संश्रयामि।।

1.इशादि पंचोपनिषद भाष्य:

१. HindiBook-ishadi-panchopanishad

2. श्री वचन भूषण भाष्य

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3. छान्दोग्य उपनिषद भाष्य

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4. गीता भाष्य

गीता भाष्य

5. वार्तामाला टीका

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5. पुरुष-सूक्त एवं श्री-सूक्त:

पुरुष-सूक्त

Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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