रामानुजमतसंग्रह

श्री देवी एवं भू देवी द्वारा सेवित, शेष पर्यंक पर शयन करने वाले, समस्त जगत के शेषी एवं शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले भगवान की शरण लेकर एवं अपने गुरु परम्परा की वन्दना कर पाट्टाचार्य स्वामी के सुपुत्र श्रीनिवासाचार्य स्वामी ‘रामानुजमतसंग्रह’ नामक ग्रन्थ में श्री लक्ष्मण मुनि के सिद्धान्त का सरल भाषा में संक्षिप्त रूप से वर्णन करते हैं| प्रारम्भिक स्तर पर रामानुज-दर्शन समझने हेतु यह अत्युत्तम ग्रन्थ है|

श्री वैष्णव गुरु परम्परा: श्री वैष्णव गुरु परम्परा

हरि-श्री देवी – सैन्यराट (विष्वक्सेन) – कारि (शठकोप आलवार) – पुण्डरीकाक्ष स्वामी -राम मिश्र स्वामी – यामुन मुनि – महापूर्ण स्वामी -लक्ष्मण मुनि (रामानुज स्वामी) – आम्नाय शेखर (वेदान्त देशिक)

रामानुज दर्शन के पूर्वाचार्य श्री वेद व्यास एवं बोधायन महर्षि हैं| इनके मत में परमात्मा श्रीपति हैं, समस्त चित-अचित के शरीरि (आत्मा) हैं एवं वही एकमात्र वेदान्त के प्रधान प्रतिपाद्य विषय हैं|

अचित् प्रकरण

पदार्थ विभाग भाग 1: प्रकृति से महत एवं महत से अहंकार एवं सात्त्विक अहंकार से 11 इन्द्रियों की उत्पत्ति :- https://ramanujramprapnna.blog/2025/06/16/padaartha-vibhaaga/

पदार्थ विभाग भाग 2: https://ramanujramprapnna.blog/2025/06/16/padaartha-vibhaag-part-2/

तामस अहंकार से तन्मात्र एवं भूतों की उत्पत्ति: https://ramanujramprapnna.blog/2025/06/16/evolution-of-bhootas-from-tamas-ahankaara/

पञ्च-भूतों एवं 11 इन्द्रियों का सम्बन्ध, भूतों के गुण: https://ramanujramprapnna.blog/2025/06/16/bhootas-indriyas-gunas-and-vishayas/

पंचीकरण: https://ramanujramprapnna.blog/2025/06/16/panchikaranam/

समष्टि एवं व्यष्टि सृष्टि:

ब्रह्म का जगद-कारणत्व : https://ramanujramprapnna.blog/2025/06/17/jagad-kaaranatvam-of-brahma/

ब्रह्म का जगद-कारणत्व भाग २: ब्रह्म का जगद-कारणत्व भाग २

काल निरूपण: काल निरूपण

शुद्ध सत्त्व निरूपण: शुद्ध सत्त्व निरूपण

चित् प्रकरण

जीवात्म-स्वरुप निरूपण: जीव-तत्त्व निरूपण

स्वयं-प्रकाश, ज्ञानस्वरुप, जड़ एवं अजड़ के विषय में : स्वयंप्रकाश, स्वस्मै स्वयं प्रकाश, परस्मै स्वयं प्रकाश, जड और अजड के विषय में ।

ज्ञानस्वरूप एवं ज्ञानाश्रय जीवात्मा : ज्ञानस्वरूप एवं ज्ञानाश्रय जीवात्मा

धर्मभूत ज्ञान : धर्मभूत ज्ञान

सत्-ख्याति : जगत सत्यत्वम् – सत्-ख्याति : जगत सत्यत्वम्

जीवात्मा का देह, इन्द्रिय, ज्ञान आदि से भिन्नता –

जीवात्म-ऐक्य का खण्डन –जीवात्म-ऐक्य का खण्डन

परमात्म-स्वरुप निरूपण –

चित-अचित का ब्रह्म-शरीरक होना:

भेद-अभेद श्रुतियों का रामानुज-दर्शन में तात्पर्य: भेद-अभेद श्रुतियों का रामानुज-दर्शन में तात्पर्य

विष्णु ही जगद-कारण हैं – रुद्र आदि देवताओं का जगद कारणत्व असम्भव होना एवं विष्णु का जगद कारणत्व

निर्गुण एवं सगुण – भगवान का उभय लिङ्गत्व

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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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