अर्थ पंचक का अर्थ है “पंच आधार” (जिसे आवश्यक रूप से समझा जाना चाहिए)।
प्राप्यस्य ब्रह्मणो रूपम्, प्राप्तस्य प्रत्यादात्तमन: ।
प्रप्तोपाय फलम् प्राप्ते:, तथा प्राप्ति विरोधि च ।।
वदन्ति सकला वेदाः, सेतिहास पुराणका: ।
मुनयेस्य महत्मान :, वेद-वेदान्त पारगा: ।।
अर्थ पंचक इस प्रकार हैं:
१) स्व-स्वरुप (जीवात्मा) : प्राप्तस्य प्रत्यादात्तमन:
२) पर-स्वरुप, परमात्मा-स्वरुप (ईश्वर, ब्रह्म) : प्राप्यस्य ब्रह्मणो रूपम्
३) प्राप्य-स्वरुप, उपेय-स्वरुप, फल-स्वरुप (पुरुषार्थ, लक्ष्य) : फलम् प्राप्ते:
४) उपाय स्वरूप (साधन, हित) : प्रप्तोपाय
५) विरोधी स्वरुप (बाधाएं) : प्राप्ति विरोधि च
इसे आसान भाषा में इस प्रकार याद किया जा सकता है – YAHOO
Y- You (स्व-स्वरुप)
A- Access (पर-स्वरुप)
H- hita (उपाय स्वरूप)
O- objective (फल-स्वरुप) ; O- obstruction (विरोधी स्वरुप)
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References:
https://srivaishnavagranthamshindi.wordpress.com/thathva-thrayam/
