पञ्च-संस्कार: दीक्षा का अर्थ

“पञ्च संस्कार”

हमारे पूर्वाचार्यो के अनुसार, एक क्रिया-विधि है, जिसके द्वारा श्रीवैष्णव बना जाता है।  इस विधि को “संप्रदाय में दीक्षा” कहा जाता है। इसे ‘गुर्मुक’ होना भी कहते हैं। इसका अर्थ है गुरु, अग्नि एवं भगवान के समक्ष भगवान की शरणागति करना। पद्म पुराण में वैष्णव कि पहचान निम्न रूप में दी गयी है:

ताप: पुण्ड्र: तथा नाम: मंत्रो यागश्च पंचम:”(पद्म पुराण) विस्तृत अध्ययन के लिये निम्न लिंक को खोलें

दीक्षा

अर्थ-पंचक , श्री वैष्णव संप्रदाय का आधार

अर्थ पंचक का अर्थ है “पंच आधार” (जिसे आवश्यक रूप से समझा जाना चाहिए)।

प्राप्यस्य ब्रह्मणो रूपम्, प्राप्तस्य प्रत्यादात्तमन: ।
प्रप्तोपाय फलम् प्राप्ते:, तथा प्राप्ति विरोधि च ।।
वदन्ति सकला वेदाः, सेतिहास पुराणका: ।
मुनयेस्य महत्मान :, वेद-वेदान्त पारगा: ।।

अर्थ पंचक इस प्रकार हैं:

१) स्व-स्वरुप (जीवात्मा) : प्राप्तस्य प्रत्यादात्तमन:

२) पर-स्वरुप, परमात्मा-स्वरुप (ईश्वर, ब्रह्म) : प्राप्यस्य ब्रह्मणो रूपम्

३) प्राप्य-स्वरुप, उपेय-स्वरुप, फल-स्वरुप (पुरुषार्थ, लक्ष्य) :  फलम् प्राप्ते:

४) उपाय स्वरूप (साधन, हित) : प्रप्तोपाय

५) विरोधी स्वरुप (बाधाएं) : प्राप्ति विरोधि च

इसे आसान भाषा में इस प्रकार याद किया जा सकता है – YAHOO

Y- You (स्व-स्वरुप)

A- Access (पर-स्वरुप)

H- hita (उपाय स्वरूप)

O- objective (फल-स्वरुप) ;  O- obstruction (विरोधी स्वरुप)

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arth-panchak

References:

https://srivaishnavagranthamshindi.wordpress.com/thathva-thrayam/