तिरुप्पावै (गोदा देवी जी का दिव्य व्रत)

लक्ष्मीनाथ समारम्भाम नाथ यामुन मध्यमाम|

अस्मद आचार्य पर्यन्ताम, वन्दे गुरु परम्पराम||

श्री विष्णुचित्त कुलनंदन कल्पवल्लिम, श्री रंगराज हरिचंदन योगदृश्यां|

साक्षात् क्षमां करुणया कमलामिवान्यां, गोदाम अनन्यशरण: शरणं प्रपद्ये||

अर्थात: श्री गोदा (आंडाल्) श्री विष्णुचित्त के कुल नंदवन में आविर्भूत कोमल कल्पलता सम सुन्दर कन्या हैं| श्री रंगनाथ रूपी हरिचंदन वृक्ष के योग से अतिलावण्यमयी और मनोहर दिखाई देती हैं| यह मूर्तिमान भूमि देवी हैं और लक्ष्मी देवी के समान क्षमाशील और करुणामयी हैं| निराश्रित मैं उस गोदा देवी की शरण लेता हूँ|

तिरुप्पावै गोदा देवी द्वारा विरचित दिव्य प्रबंध है| तिरुप्पावै की ३० सूक्तियों में समस्त उपनिषद् और शरणागति का अनुष्ठान निहित है|

संस्कृत में गोदा का अर्थ होता है: सुन्दर एवं मधुर शब्द|

तमिल में गोदा का अर्थ होता है: पुष्पमाला|

गोदा यानि आंडाल ने भगवान को दोनों ही अर्पित किया|

व्याकरण और दर्शन के ज्ञान से रहित होने के वावजूद हम युवा श्री वैष्णवों ने गोदा जी की इस दिव्य, अद्भुत दिव्य प्रबंध के हिंदी अनुवाद का संकल्प लिया है| अनुवाद में हमारा अपना कुछ भी नहीं| विभिन्न आचार्यों के कालक्षेप द्वारा जो कुछ सिख और समझ पाया, वही जस का तस भगवद-गोष्ठी को समर्पित कर रहा हूँ:

तनियन

  1. पहला तनियन: https://ramanujramprapnna.blog/2019/03/15/%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-1/
  2. दूसरा तनियन: https://ramanujramprapnna.blog/2019/03/16/%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-2/
  3. तीसरा तनियन: https://ramanujramprapnna.blog/2019/03/16/%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-3/

गोदा जी का दिव्य चरित्र

  1. https://guruparamparaihindi.wordpress.com/2014/12/15/andal/
  2. गोदाम्बा जी का संक्षिप्त जीवन चरित्र :https://ramanujramprapnna.blog/2019/03/17/%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4/

मार्घशीर्ष (धनुर्मास) की विशेषता:

  1. मार्घशीर्ष महीने का वैभव:Link: https://wp.me/p9Ex6B-7w

पासुर (गाथा):

  1. तिरुपावै पहला पासुर (व्रत का उपोद्घात)
  2. तिरुपावै पहला पासुर: स्वापदेश
  3. तिरुपावै 2 (व्रत के नियम)
  4. तिरुपावै 3 (व्रत का बाह्य फल)
  5. तिरुपावै 4 (न केवल प्रकृति बल्कि देवता भी हमारे साथ होंगे।)
  6. तिरुपावै 5 (व्रत के विरोधियों का नष्ट होना)
  7. तिरुपावै 6 (मुग्धा गोपी का उत्थापन)
  8. तिरुपावै 7वाँ पासूर (भ्रान्त/मतिवर्जिता गोपी का उत्थापन)
  9. तिरुपावै 8 (कृष्णवाल्लभ्यशालिनी गोपी का उत्थापन)
  10. तिरुपावै 9वाँ पासूर (मामाजी की बेटी गोपी का उत्थापन)
  11.  तिरुपावै 10वाँ पासूर (गोपीजनशिरोमणि/स्वामिनी गोपी का उत्थापन)
  12. तिरुपावै 11 वाँ पासूर (स्वर्णलता गोपी का उत्थापन)
  13. तिरुपावै 12 वाँ पासूर (कृष्ण-कैंकर्य-प्राप्त गोप की बहन गोपी का उत्थापन)
  14. तिरुपावै 13 वाँ पासूर (पुष्प-सौकुमार्य-हरिनयन नारीमणि गोपी का उत्थापन)
  15. तिरुपावै 14 वाँ पासूर (लज्जाहीन एवं वाचाल गोपी का उत्थापन, इसने सभी सखियों से वादा किया था कि वह सबसे पहले उठकर सबको जगा देगी परन्तु वह स्वयं सो रही है|)
  16. तिरुप्पावै 15 (बालशुक गोपी का उत्थापन)
  17. तिरुपावै 16 वाँ पासूर (नन्दगोप के महल के द्वारपाल एवं क्षेत्रपाल का उत्थापन)
  18. तिरुप्पावै 17 (नन्द जी, यशोदा मैया एवं बलदेव जी का उत्थापन)
  19. तिरुप्पावै 18 (नप्पिनै (राधा) देवी का उत्थापन)
  20. तिरुप्पावै 19 (नप्पिनै के स्तन पर सो रहे कन्हैया का उत्थापन)
  21. तिरुप्पावै 20 (कृष्ण एवं नप्पिनै का उत्थापन)
  22. तिरुप्पावै 21 ( कन्हैया के प्रति अकिंचनत्व, अनन्य-गतित्व एवं महाविश्वास का प्रकाशन )
  23. तिरुप्पावै 22 (अनन्य-गतित्व एवं अनन्यार्ह शेषत्व का प्रकाशन )
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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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