भगवान की उदारता

श्रीनिवास भगवान हमहि अपने अपनाये जी ।

ग्रन्थन में यह मिलत सबन में,

नर तन सुर दुर्लभ भारत में,

दे कर के भगवान हमहि,

वैष्णव जी बनवाये ।। श्री ०।।

पञ्चरात्र से शास्त्र मनोहर,

गीता के ज्ञानों अति सुन्दर,

ऐसे वचन सुनाय सुगम,

मारग बतलाये जी ।। श्री ०।।

भाष्यकार के चरण लगाकर,

भगवत जन के सुहृद् बनाकर,

इन कर सेवा दे कर सुलभ –

उपाय बताये जी ।।श्री।।

दीन-हीन लख कृपा किये प्रभु,

आरत हर गुण प्रकट किये हरि,

युगल चरण अति सुन्दर,

सिद्ध उपाय बताये जी ।। श्री०।।

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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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