आलवार एवं श्रीवैष्णवाचार्यों की परम्परा

वेङ्कट गिरिपर भगवान जी, आये अधम उधारन।

भूत योगीश्वर महत भट्टवर, भक्तिसार अगवान जी। आये०

कुलशेखर श्रीयोगीवाहन, भक्त चरण रजमान जी। आये ०

जामातृ परकाल वीरवर, जिनसे लुटाये भगवान जी। आये ०

भाष्यकार यामुनमुनि योगी, राममिश्र परधान।आये ०

स्वामी पुण्डरीक-लोचनवर कृपा किये जन जान जी।आये ०

नाथ मुनिहुँ शठकोप मुनीश्वर विश्वक्सेन परधान जी।आये ०

माता श्री लक्ष्मी महारानी दया करो जन जान जी। आये ०

दीनहिं के हित भूतल आये, जानत परम सुजान जी। आये०

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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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