वेङ्कट गिरिपर भगवान जी, आये अधम उधारन।
भूत योगीश्वर महत भट्टवर, भक्तिसार अगवान जी। आये०
कुलशेखर श्रीयोगीवाहन, भक्त चरण रजमान जी। आये ०
जामातृ परकाल वीरवर, जिनसे लुटाये भगवान जी। आये ०
भाष्यकार यामुनमुनि योगी, राममिश्र परधान।आये ०
स्वामी पुण्डरीक-लोचनवर कृपा किये जन जान जी।आये ०
नाथ मुनिहुँ शठकोप मुनीश्वर विश्वक्सेन परधान जी।आये ०
माता श्री लक्ष्मी महारानी दया करो जन जान जी। आये ०
दीनहिं के हित भूतल आये, जानत परम सुजान जी। आये०
