15. अनंग दशा

दृङ्मनः सङ्गसङ्कल्पा जागरः कृशता रतिः । ह्रीत्यागोन्मादमूर्च्छान्ता इत्यनङ्गदशा दश ॥

जैसे तुच्छ विषयों में आसक्त व्यक्ति अपने प्रिय विषय की दृष्टि का संकल्प (प्रिय को टकटकी लगाकर देखना), मन का संकल्प (मन ही मन प्रिय में खो जाना), संग का संकल्प (मिलन की योजना बनाना), जागरण (रातों की नींद उड़ जाना), कृशता (शरीर का सूखकर कमजोर हो जाना), अरुचि (किसी भी अन्य काम में मन न लगना), लज्जा का त्याग, उन्माद, मूर्छा और मृत्यु संतापदायक अवस्थाओं का अनुभव करता है, वैसे ही भगवान् में अत्यन्त अनुरक्त यह अधिकारी भी उन्हीं अवस्थाओं को प्राप्त होता है। इसका वर्णन आळ्वार ने अनेक स्थानों पर किया है—

“காணவாராயென்றென்று கண்ணும் வாயும் துவர்ந்து.” (Periya Tirumozhi 2.8.5)

(हिन्दी अर्थ): “‘दर्शन देने आइए’ कहते-कहते नेत्र और मुख शुष्क हो जाते हैं।”

“எண்ணே கொண்ட சிந்தையதாய் நின்றியம்பும்.” thiruvAimozhi – 9.4.2 – kaNNE! unnai – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “मन उसी के चिन्तन में स्थित होकर उसी का नाम उच्चारित करता है।”

“அடியேனடிகூடுவதென்றுகொலோ.” thiruvAimozhi – 5.9.1 – mAnEy nOkku – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “यह दास आपके श्रीचरणों को कब प्राप्त करेगा?”

“கங்குலும் பகலும் கண்துயிலறியாள்.” thiruvAimozhi – 7.2.1 – kangulum pagalum – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “रात और दिन उसे निद्रा नहीं आती।”

“நையுங்கண்ணீர்மல்க நின்று.” thiruvAimozhi – 4.4.2 – pey vaLai – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “वह क्षीण होकर अश्रुओं से भरा खड़ी रहती है।”

“திமிர்கொண்டாலொத்து நிற்கும்.” thiruvAimozhi – 6.5.2 – kumiRum Osai – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “वह स्तब्ध होकर बिना कुछ बोले खड़ी रहती  है।”

“இட்டகாலிட்ட கையளாயிருக்கும்.” thiruvAimozhi – 7.2.4 – itta kAl – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “चाहे कहीं भी रख दिया गया हो, मेरी पुत्री के हाथ-पाँव स्थिर ही रहते हैं।”

“நின்னலாலிலேன்காண்.” thiruvAimozhi – 2.3.7 – munnal yAzh – KOYIL 

(हिन्दी अर्थ): “देखो, मैं तुम्हारे बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं, मैं जी नहीं सकुंगी, इसलिए अपने ह्रदय में रखो।”

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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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