भगवान की उदारता (श्रीनिवास भगवान हमहि अपने अपनाये जी ।)

स्वामिश्री परांकुशाचार्य जी ने रहस्यार्थों को सरल शब्दों में प्रकाशित करने हेतु अर्चा गुणगान की रचना की

भगवान द्वारा जीवात्मा को प्राप्त करने हेतु किये गए प्रयत्न

श्रीनिवास भगवान हमहि अपने अपनाये जी ।

1. ग्रन्थन में यह मिलत सबन में,

नर तन सुर दुर्लभ भारत में,

दे कर के भगवान हमहि,

वैष्णव जी बनवाये ।। श्री ०।।

पञ्च-संस्कार की प्रक्रिया से भगवान हमें वैष्णव बनाते हैं

2. पञ्चरात्र से शास्त्र मनोहर,

गीता के ज्ञानों अति सुन्दर,

ऐसे वचन सुनाय सुगम,

मारग बतलाये जी ।। श्री ०।।

गीताचार्य भगवान श्री पार्थसारथी (तिरुवल्लिकेनि, चेन्नई)

3. भाष्यकार के चरण लगाकर,

भागवत जन के सुहृद् बनाकर,

इन कर सेवा दे कर सुलभ –

उपाय बताये जी ।।श्री।।

भाष्यकार रामानुजाचार्य स्वामीजी ही उद्धारक आचार्य हैं। उनके सम्बन्ध से ही हमारा मोक्ष है।

4. दीन-हीन लख कृपा किये प्रभु,

आरत हरण गुण प्रकट किये हरि,

युगल चरण अति सुन्दर,

सिद्ध उपाय बताये जी ।। श्री०।।

आरत हरण गजेन्द्र वरद भगवान
भगवान के युगल (दोनों) चरण ही सिद्ध उपाय हैं, यह शिक्षा द्वय मन्त्र के पूर्व भाग से प्राप्त होता है।
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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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