भगवान का सबसे सुलभ अवतार : अर्चा मूर्ति

1. श्रीनिवास आश्रित हित अपना, अर्चा रूप बनाते हैं।

द्रवित हृदय से आये गिरि पर, वेङ्कटनाथ कहाते हैं ।।

वेंकट पर्वत पर भगवान ने श्रीनिवास अवतार लिया। राम, कृष्ण आदि अवतार तो एक देश और एक काल में ही सुलभ हुए थे। अर्चा अवतार में भगवान सबके लिए सभी देश और सभी काल में सुलभ हो गए।

2. व्रात जनों के रक्षण हित, रक्षा-कङ्कण बन्धवाते हैं ।

शरणागत पर प्रेममयी, शीतल अँखिया दिखलाते हैं ।।

वेंकटेश भगवान के उत्सव मूर्ति ‘मलयप्पा स्वामी’ का पवित्रोत्सव। पीला पवित्र माला और पीताम्बर भगवान के शरणागत-परित्राण के व्रत को दर्शाता है। (जो व्रत लेते हैं, वो व्रत की समाप्ति तक पीला धागा बाँधे रहते हैं।)

3. दक्षिण कर से सब प्रकार, युग चरण उपाय बताते हैं ।

त्यों वामे करसे भव के लघु तरतर भाव बताते हैं ।।

दाहिने हस्त से अपने चरणों की शरण लेने की शिक्षा देते हैं (माम् एकं शरणं व्रज) और बाएं हस्त बताते हैं कि शरणागति के पश्चात जिसमें तुम डूब रहे हो, मैं उस संसार सागर को तुम्हारे घटने तक ला दूँगा। (सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि)।

4. अन्य हाथ में शङ्ख सुदर्शन, धर ऊँचे दिखलाते हैं।

‘डरो नहीं तुम डरो नहीं तुम, डरो नहीं हम आते हैं’ ।।

शंख भगवान के ज्ञान का और चक्र उनकी शक्ति का प्रतीक है। ‘डरो नहीं’, सर्वशक्तिमान भगवान तुम्हारे रक्षक हैं। (जैसे गजेन्द्र की रक्षा की है)

5. मैं हूँ अखिल लोक के नायक मुकुट पहन बतलाते हैं।

देखो वेद पुराण सूत्र गण, मेरे ही गुण गाते हैं ।।

भगवान का मुकुट उनके ‘स्वामित्व’ गुण का प्रकाश करते हुए कहता है कि यही अखिलाण्ड-कोटि-ब्रह्माण्ड-नायक नायक
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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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