7. आश्रयदुष्ट पदार्थ एवं निमित्तदुष्ट पदार्थ

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Series: विलक्षण-मोक्षाधिकारी-निर्णय

आश्रयदुष्ट वे हैं—

जो अभिशस्त (बहिष्कृत/गर्हित), पतित, चाण्डाल तथा अभिमान-दूषित व्यक्तियों के संसर्ग से प्राप्त हुए हों। (दोषयुक्त बर्तनों में पकाए गए हों)

निमित्तदुष्ट वे हैं—

जो केश, उच्छिष्ट तथा अपवित्र स्पर्श आदि (कुत्ते या बिल्ली की दृष्टि पड़ी हो, कटा नाखून, कीड़े, भूमि पर पतित) से दूषित हो गए हों। (बर्तन में निकाला हुआ नारियल जल, २ घंटे से अधिक काल से पश्चात फलों का रस आदि भी)

इन तीनों का परित्याग करना ही आहार-नियति है।

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Author: ramanujramprapnna

studying Ramanuj school of Vishishtadvait vedant

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